यूनिवर्स का वो इशारा जिसने मेरी पूरी जिंदगी पलट दी..
555 Angel Number Real Story😎
पता है, एक टाइम था जब मैं भी इन 'यूनिवर्स के मैसेज' और एंजल नंबर्स पर खूब हंसता था। मुझे लगता था यार ये सब खाली बैठे लोगों के चोंचले हैं। जिनके पास लाइफ में कोई काम-धाम नहीं है, वो बस यही सब सोचते रहते हैं। पर फिर... 2022 में मेरी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया ना... जिसने मेरा ये सारा फितूर दिमाग से निकाल दिया। एकदम जड़ से।जब 555 नंबर ने मुझे झकझोर कर रख दिया
मुझे आज भी वो रात याद है। मैं अपने कमरे में बिल्कुल अकेला बैठा था और अंदर ही अंदर घुट रहा था। तीन साल हो गए थे मुझे उस जॉब में। पैसा बढ़िया आ रहा था, लाइफ सेट लग रही थी, पर अंदर से रोज़ एक ही आवाज़ कचोटती थी— "ये तेरी जगह नहीं है यार... तू इस चीज़ के लिए नहीं बना है। मैं रिजाइन करने का सोच रहा था पर सच बताऊं? मेरी हिम्मत नहीं पड़ रही थी। बहुत डर लग रहा था कि आगे क्या होगा। उसी उधेड़बुन में पता नहीं कैसे, मेरी नज़र सामने दीवार घड़ी पर गई। टाइम हो रहा था एकदम 5:55। उस एक पल ने... मैं कैसे समझाऊं... मुझे अंदर तक हिला दिया। एक अजीब सी झुरझुरी पूरे शरीर में दौड़ गई। ऐसा लगा जैसे किसी ने मुझे गहरी नींद से झकझोर कर उठाया हो।
अगले दिन सुबह की बात है। मैंने टपरी पर चाय पी और चाय वाले को पैसे दिए। उसने मुझे जो छुट्टे वापस किए ना... वो पूरे 555 रुपये थे। मैंने सोचा, चलो इत्तेफाक होगा, छोड़ो यार। लेकिन उसी दिन शाम को जब मैं ऑफिस से लौट रहा था, तो मेरे ठीक आगे जो गाड़ी चल रही थी... उसकी नंबर प्लेट पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा था— 555। अब मेरा दिमाग ठनका। ये बार-बार मेरे ही साथ क्यों हो रहा है?555 का असली मतलब क्या है?
उस रात जो बेचैनी हुई, उसने मुझे सोने नहीं दिया। मैंने पागलों की तरह इंटरनेट खंगालना शुरू किया। और जो समझ में आया, उसने मेरी आँखें खोल दीं। पता चला कि ये जो 555 है ना... ये यूनिवर्स का सीधा अलर्ट है। एक बहुत बड़े, लाइफ पलटने वाले बदलाव का। एक ऐसा बदलाव जिससे आप शायद अंदर ही अंदर बहुत डर रहे हो, भाग रहे हो... पर जो आपके आगे के सफर के लिए बहुत ज़रूरी है।और यार, मेरी लाइफ में तब एग्जैक्टली यही तो चल रहा था! अपना वो 'सेफ ज़ोन' छोड़ने का खौफ... खुद पर भरोसा करने की वो जंग। मुझे लिटरली ऐसा फील हुआ जैसे साक्षात यूनिवर्स ने मेरे कंधे पर हाथ रखा हो और कहा हो— "तू सही रास्ते पर है, घबरा मत।" अंक ज्योतिष में भी नंबर 5 को आज़ादी और पुरानी बेड़ियों को तोड़ने का नंबर मानते हैं। और जब ये 555 बनकर तीन बार सामने आता है ना... तो समझ लो यूनिवर्स चीख-चीख कर कह रहा है कि जिस फैसले से तू डर के भाग रहा है, उसका सामना कर। हाँ, रास्ता आसान नहीं होगा... पर चलना तो पड़ेगा भाई।वो फैसला जिसने मेरी लाइफ बदल दी
उसी महीने... मैंने फाइनली वो कर दिया। मैंने वो सेफ जॉब छोड़ दी। घरवाले बुरी तरह डरे हुए थे। और ईमानदारी से कहूं, तो शुरुआती तीन महीने किसी भयानक सपने से कम नहीं थे। मेरी सेविंग्स पानी की तरह बह रही थी। कसम से, कई रातें मैं जाग कर रोया हूँ। लगता था दीवार में सिर मार लूं कि ये क्या बेवकूफी कर दी मैंने? अच्छी भली जिंदगी चल रही थी!
पर उसी घुप्प अंधेरे में... मुझे मेरा पहला फ्रीलांस काम मिला। बस 15 हज़ार रुपये का था वो। पर भाई, वो मेरी पहली अपनी कमाई थी! आप यकीन नहीं मानोगे, सिर्फ छह महीने के अंदर मैं अपनी उस पुरानी जॉब से कहीं ज्यादा कमाने लगा। मैं ये नहीं कह रहा कि इस 555 नंबर ने कोई जादू की छड़ी घुमा दी। नहीं यार। लेकिन उस दिन, उस घुटन भरी रात में, जब वो नंबर मेरे सामने आया था ना... तो उसने मुझे वो हिम्मत दे दी जो मैं खुद अपने अंदर कहीं बहुत गहरे दफना चुका था।
एक बात तो तय है, ये नंबर आपको यूं ही चलते-फिरते कभी नहीं दिखेगा। ये तभी फ्लैश होगा जब आप जिंदगी के किसी बहुत बड़े दोराहे पर खड़े होंगे। जब आपके अंदर एक भयानक उथल-पुथल मची होगी।
मेरी एक फ्रेंड है। उसे ये नंबर तब दिखना शुरू हुआ जब वो एक बेहद टॉक्सिक रिश्ते में घुट रही थी और बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी। जब फाइनली उसने वो रिश्ता तोड़ा, तो एक साल बाद उसने खुद मुझसे कहा कि यार, ये फैसला मुझे बहुत पहले ले लेना चाहिए था।जब आपको 555 दिखे तो क्या करना चाहिए?
अब कई लोग बोलेंगे कि यार ये तो दिमाग का वहम है। हम बस वही देखते हैं जो देखना चाहते हैं। शायद। हो सकता है। पर मेरे लिए सच क्या है पता है? जब मैंने इसे इस ब्रह्मांड का एक इशारा मान लिया... तो मेरे अंदर का सारा शोर शांत हो गया। एक अजीब सी क्लैरिटी आ गई। अगर कोई एक नंबर आपको आपकी खुद की आत्मा की आवाज़ सुनने की ताकत दे सकता है, तो इसमें नुकसान ही क्या है?
यूनिवर्स कभी आपको जज नहीं करता। वो बस आगाह करता है कि कमर कस लो... बदलाव आ रहा है।
जब भी आपको ये 555 दिखे ना, तो कोई बहुत बड़ा पूजा-पाठ करने की ज़रूरत नहीं है। बस वहीं रुक जाना एक सेकंड के लिए। एक गहरी सांस लेना। और पूरी ईमानदारी से खुद से पूछना— "मेरी लाइफ के किस हिस्से में अब बदलाव की सबसे ज्यादा ज़रूरत है?जो भी जवाब अंदर से आए ना... उसे बिना डरे एक्सेप्ट कर लेना।
इस नंबर के साथ एक अजीब सी बेचैनी आती है। बिल्कुल वैसी, जैसी किसी बड़े युद्ध से पहले एक योद्धा के सीने में होती है। डर भी लगता है, हाथ-पैर भी कांपते हैं... पर मैदान में उतरने का एक गजब का जुनून भी होता है। उस दिन मुझे भी वही आज़ादी महसूस हुई थी। लगा था कि मानो पूरी दुनिया मेरे पीछे खड़ी होकर कह रही हो- "तू चल, हम देख लेंगे।
आजकल के लोग खुद को बहुत प्रैक्टिकल मानते हैं। इन यूनिवर्स के इशारों का मजाक उड़ाते हैं। पर जरा सोचिए, हमारे पूर्वज क्या बेवकूफ थे? वो प्रकृति के इन इशारों को हमसे कहीं बेहतर समझते थे। वो इस ब्रह्मांड की एनर्जी से जुड़े हुए थे।क्या 555 दिखना हमेशा अच्छा ही होता है?
अब एक सवाल आता है कि क्या 555 दिखना हमेशा अच्छा ही होता है? हम्म... हाँ भी, और नहीं भी।
अल्टीमेटली ये आपके भले के लिए ही होता है, पर वो जो बदलाव का प्रोसेस है ना... वो कई बार बहुत दर्द देता है। मेरे एक और दोस्त के साथ ऐसा ही हुआ। उसे 555 दिखा और अगले ही हफ्ते उसकी नौकरी चली गई। वो बंदा लिटरली बिखर गया था। डिप्रेशन में चला गया था। लेकिन उसी धक्के ने... उसी दर्द ने उसे अपना खुद का बिजनेस शुरू करने की वो आग दी, जो शायद वैसे कभी नहीं मिलती।
ये नंबर आपको कहीं भी दिख सकता है। घड़ी में, किसी बिल में, या किसी गाड़ी के पीछे। पर आप इसे तभी नोटिस कर पाएंगे जब आपकी आत्मा किसी जवाब के लिए तड़प रही होगी। मुझे याद है, एक बार मुझे एक जगह बहुत बड़ा इन्वेस्टमेंट करना था और मेरी हालत खराब थी डर के मारे। तब फिर से इसी 555 ने मुझे रास्ता दिखाया। जिम में था, ट्रेडमिल की स्पीड गलती से 5.5 दब गई, लिफ्ट में किसी ने 5वां फ्लोर दबा दिया, और उसी वक्त मेरे एक दोस्त का मैसेज आया जिसका नाम मैंने फोन में मज़ाक में '555' सेव कर रखा था! मैंने आंख बंद करके वो इन्वेस्टमेंट कर दिया। और सच बताऊं? वो मेरी लाइफ का सबसे बेस्ट फाइनेंशियल डिसिजन साबित हुआ। उस नंबर ने मुझे रातों-रात अमीर नहीं बनाया, पर उसने मुझे वो भरोसा दिया जिसकी मुझे उस पल सबसे ज्यादा ज़रूरत थी।अपने अंदर की आवाज़ को इग्नोर मत करो
ये सब बातें मैं इसलिए नहीं बता रहा कि आप कल से हर नंबर को देखकर कोई अंधविश्वास पाल लें। मेरा मकसद बस इतना है कि... यार, अपने अंदर की उस धीमी सी आवाज़ को इग्नोर मत करो। ये नंबर बस खुद को ये परमिशन देने का एक तरीका है कि "हाँ, मैं जो फील कर रहा हूँ, वो सही है। जो बदलाव मुझे चाहिए, वो मेरे लिए ज़रूरी है।
अगर आपको भी आजकल 555 पीछा कर रहा है ना, तो बस थोड़ा सा ठहरिए। अपने अंदर झांक कर देखिए। देखिए कि आपकी जिंदगी की गाड़ी कहां अटकी पड़ी है? कौन सा वो डर है जो आपको जकड़े हुए है? कौन सा वो फैसला है जिसे लेने से आप बस भाग रहे हैं?
क्योंकि सच तो यही है कि रास्ता आपको पता है। जवाब आपके ही अंदर है। बदलाव डराता है यार। हम सबको डराता है। पर चाहे वो कोई नौकरी हो, कोई घुटन भरा रिश्ता हो, या आपकी अपनी पहचान... यही वो मुश्किल और कच्चे पल होते हैं जो हमें अंदर से फौलाद बनाते हैं।
तो अगली बार जब ये 555 आपकी आंखों के सामने आए, तो मुस्कुराना और खुद से पूछना— तो यूनिवर्स, अब मेरी लाइफ में क्या नया आने वाला है? अगर आपके साथ भी ऐसा कुछ हुआ है ना... कोई ऐसा यूनिवर्स का मैसेज या 555 वाला एक्सपीरियंस, तो मुझसे ज़रूर शेयर करना। कमेंट करके बताओ कि आपको मेरा ये अनुभव कैसा लगा। मुझे आपके जवाब का इंतज़ार रहेगा।
Written By- Shrawan Kumar Maurya
यूनिवर्स का वो इशारा जिसने मेरी पूरी जिंदगी पलट दी..
555 Angel Number Real Story😎
पता है, एक टाइम था जब मैं भी इन 'यूनिवर्स के मैसेज' और एंजल नंबर्स पर खूब हंसता था। मुझे लगता था यार ये सब खाली बैठे लोगों के चोंचले हैं। जिनके पास लाइफ में कोई काम-धाम नहीं है, वो बस यही सब सोचते रहते हैं। पर फिर... 2022 में मेरी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया ना... जिसने मेरा ये सारा फितूर दिमाग से निकाल दिया। एकदम जड़ से।
जब 555 नंबर ने मुझे झकझोर कर रख दिया
मुझे आज भी वो रात याद है। मैं अपने कमरे में बिल्कुल अकेला बैठा था और अंदर ही अंदर घुट रहा था। तीन साल हो गए थे मुझे उस जॉब में। पैसा बढ़िया आ रहा था, लाइफ सेट लग रही थी, पर अंदर से रोज़ एक ही आवाज़ कचोटती थी— "ये तेरी जगह नहीं है यार... तू इस चीज़ के लिए नहीं बना है।
मैं रिजाइन करने का सोच रहा था पर सच बताऊं? मेरी हिम्मत नहीं पड़ रही थी। बहुत डर लग रहा था कि आगे क्या होगा। उसी उधेड़बुन में पता नहीं कैसे, मेरी नज़र सामने दीवार घड़ी पर गई। टाइम हो रहा था एकदम 5:55। उस एक पल ने... मैं कैसे समझाऊं... मुझे अंदर तक हिला दिया। एक अजीब सी झुरझुरी पूरे शरीर में दौड़ गई। ऐसा लगा जैसे किसी ने मुझे गहरी नींद से झकझोर कर उठाया हो।
अगले दिन सुबह की बात है। मैंने टपरी पर चाय पी और चाय वाले को पैसे दिए। उसने मुझे जो छुट्टे वापस किए ना... वो पूरे 555 रुपये थे। मैंने सोचा, चलो इत्तेफाक होगा, छोड़ो यार। लेकिन उसी दिन शाम को जब मैं ऑफिस से लौट रहा था, तो मेरे ठीक आगे जो गाड़ी चल रही थी... उसकी नंबर प्लेट पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा था— 555। अब मेरा दिमाग ठनका। ये बार-बार मेरे ही साथ क्यों हो रहा है?
555 का असली मतलब क्या है?
उस रात जो बेचैनी हुई, उसने मुझे सोने नहीं दिया। मैंने पागलों की तरह इंटरनेट खंगालना शुरू किया। और जो समझ में आया, उसने मेरी आँखें खोल दीं। पता चला कि ये जो 555 है ना... ये यूनिवर्स का सीधा अलर्ट है। एक बहुत बड़े, लाइफ पलटने वाले बदलाव का। एक ऐसा बदलाव जिससे आप शायद अंदर ही अंदर बहुत डर रहे हो, भाग रहे हो... पर जो आपके आगे के सफर के लिए बहुत ज़रूरी है।और यार, मेरी लाइफ में तब एग्जैक्टली यही तो चल रहा था! अपना वो 'सेफ ज़ोन' छोड़ने का खौफ... खुद पर भरोसा करने की वो जंग। मुझे लिटरली ऐसा फील हुआ जैसे साक्षात यूनिवर्स ने मेरे कंधे पर हाथ रखा हो और कहा हो— "तू सही रास्ते पर है, घबरा मत।" अंक ज्योतिष में भी नंबर 5 को आज़ादी और पुरानी बेड़ियों को तोड़ने का नंबर मानते हैं। और जब ये 555 बनकर तीन बार सामने आता है ना... तो समझ लो यूनिवर्स चीख-चीख कर कह रहा है कि जिस फैसले से तू डर के भाग रहा है, उसका सामना कर। हाँ, रास्ता आसान नहीं होगा... पर चलना तो पड़ेगा भाई।
वो फैसला जिसने मेरी लाइफ बदल दी
उसी महीने... मैंने फाइनली वो कर दिया। मैंने वो सेफ जॉब छोड़ दी। घरवाले बुरी तरह डरे हुए थे। और ईमानदारी से कहूं, तो शुरुआती तीन महीने किसी भयानक सपने से कम नहीं थे। मेरी सेविंग्स पानी की तरह बह रही थी। कसम से, कई रातें मैं जाग कर रोया हूँ। लगता था दीवार में सिर मार लूं कि ये क्या बेवकूफी कर दी मैंने? अच्छी भली जिंदगी चल रही थी!पर उसी घुप्प अंधेरे में... मुझे मेरा पहला फ्रीलांस काम मिला। बस 15 हज़ार रुपये का था वो। पर भाई, वो मेरी पहली अपनी कमाई थी! आप यकीन नहीं मानोगे, सिर्फ छह महीने के अंदर मैं अपनी उस पुरानी जॉब से कहीं ज्यादा कमाने लगा। मैं ये नहीं कह रहा कि इस 555 नंबर ने कोई जादू की छड़ी घुमा दी। नहीं यार। लेकिन उस दिन, उस घुटन भरी रात में, जब वो नंबर मेरे सामने आया था ना... तो उसने मुझे वो हिम्मत दे दी जो मैं खुद अपने अंदर कहीं बहुत गहरे दफना चुका था।
एक बात तो तय है, ये नंबर आपको यूं ही चलते-फिरते कभी नहीं दिखेगा। ये तभी फ्लैश होगा जब आप जिंदगी के किसी बहुत बड़े दोराहे पर खड़े होंगे। जब आपके अंदर एक भयानक उथल-पुथल मची होगी।
मेरी एक फ्रेंड है। उसे ये नंबर तब दिखना शुरू हुआ जब वो एक बेहद टॉक्सिक रिश्ते में घुट रही थी और बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी। जब फाइनली उसने वो रिश्ता तोड़ा, तो एक साल बाद उसने खुद मुझसे कहा कि यार, ये फैसला मुझे बहुत पहले ले लेना चाहिए था।
जब आपको 555 दिखे तो क्या करना चाहिए?
अब कई लोग बोलेंगे कि यार ये तो दिमाग का वहम है। हम बस वही देखते हैं जो देखना चाहते हैं। शायद। हो सकता है। पर मेरे लिए सच क्या है पता है? जब मैंने इसे इस ब्रह्मांड का एक इशारा मान लिया... तो मेरे अंदर का सारा शोर शांत हो गया। एक अजीब सी क्लैरिटी आ गई। अगर कोई एक नंबर आपको आपकी खुद की आत्मा की आवाज़ सुनने की ताकत दे सकता है, तो इसमें नुकसान ही क्या है?यूनिवर्स कभी आपको जज नहीं करता। वो बस आगाह करता है कि कमर कस लो... बदलाव आ रहा है।
जब भी आपको ये 555 दिखे ना, तो कोई बहुत बड़ा पूजा-पाठ करने की ज़रूरत नहीं है। बस वहीं रुक जाना एक सेकंड के लिए। एक गहरी सांस लेना। और पूरी ईमानदारी से खुद से पूछना— "मेरी लाइफ के किस हिस्से में अब बदलाव की सबसे ज्यादा ज़रूरत है?
जो भी जवाब अंदर से आए ना... उसे बिना डरे एक्सेप्ट कर लेना।
इस नंबर के साथ एक अजीब सी बेचैनी आती है। बिल्कुल वैसी, जैसी किसी बड़े युद्ध से पहले एक योद्धा के सीने में होती है। डर भी लगता है, हाथ-पैर भी कांपते हैं... पर मैदान में उतरने का एक गजब का जुनून भी होता है। उस दिन मुझे भी वही आज़ादी महसूस हुई थी। लगा था कि मानो पूरी दुनिया मेरे पीछे खड़ी होकर कह रही हो- "तू चल, हम देख लेंगे।
इस नंबर के साथ एक अजीब सी बेचैनी आती है। बिल्कुल वैसी, जैसी किसी बड़े युद्ध से पहले एक योद्धा के सीने में होती है। डर भी लगता है, हाथ-पैर भी कांपते हैं... पर मैदान में उतरने का एक गजब का जुनून भी होता है। उस दिन मुझे भी वही आज़ादी महसूस हुई थी। लगा था कि मानो पूरी दुनिया मेरे पीछे खड़ी होकर कह रही हो- "तू चल, हम देख लेंगे।
आजकल के लोग खुद को बहुत प्रैक्टिकल मानते हैं। इन यूनिवर्स के इशारों का मजाक उड़ाते हैं। पर जरा सोचिए, हमारे पूर्वज क्या बेवकूफ थे? वो प्रकृति के इन इशारों को हमसे कहीं बेहतर समझते थे। वो इस ब्रह्मांड की एनर्जी से जुड़े हुए थे।
क्या 555 दिखना हमेशा अच्छा ही होता है?
अब एक सवाल आता है कि क्या 555 दिखना हमेशा अच्छा ही होता है? हम्म... हाँ भी, और नहीं भी।अल्टीमेटली ये आपके भले के लिए ही होता है, पर वो जो बदलाव का प्रोसेस है ना... वो कई बार बहुत दर्द देता है। मेरे एक और दोस्त के साथ ऐसा ही हुआ। उसे 555 दिखा और अगले ही हफ्ते उसकी नौकरी चली गई। वो बंदा लिटरली बिखर गया था। डिप्रेशन में चला गया था। लेकिन उसी धक्के ने... उसी दर्द ने उसे अपना खुद का बिजनेस शुरू करने की वो आग दी, जो शायद वैसे कभी नहीं मिलती।
ये नंबर आपको कहीं भी दिख सकता है। घड़ी में, किसी बिल में, या किसी गाड़ी के पीछे। पर आप इसे तभी नोटिस कर पाएंगे जब आपकी आत्मा किसी जवाब के लिए तड़प रही होगी। मुझे याद है, एक बार मुझे एक जगह बहुत बड़ा इन्वेस्टमेंट करना था और मेरी हालत खराब थी डर के मारे। तब फिर से इसी 555 ने मुझे रास्ता दिखाया। जिम में था, ट्रेडमिल की स्पीड गलती से 5.5 दब गई, लिफ्ट में किसी ने 5वां फ्लोर दबा दिया,
और उसी वक्त मेरे एक दोस्त का मैसेज आया जिसका नाम मैंने फोन में मज़ाक में '555' सेव कर रखा था! मैंने आंख बंद करके वो इन्वेस्टमेंट कर दिया। और सच बताऊं? वो मेरी लाइफ का सबसे बेस्ट फाइनेंशियल डिसिजन साबित हुआ। उस नंबर ने मुझे रातों-रात अमीर नहीं बनाया, पर उसने मुझे वो भरोसा दिया जिसकी मुझे उस पल सबसे ज्यादा ज़रूरत थी।
अपने अंदर की आवाज़ को इग्नोर मत करो
ये सब बातें मैं इसलिए नहीं बता रहा कि आप कल से हर नंबर को देखकर कोई अंधविश्वास पाल लें। मेरा मकसद बस इतना है कि... यार, अपने अंदर की उस धीमी सी आवाज़ को इग्नोर मत करो। ये नंबर बस खुद को ये परमिशन देने का एक तरीका है कि "हाँ, मैं जो फील कर रहा हूँ, वो सही है। जो बदलाव मुझे चाहिए, वो मेरे लिए ज़रूरी है।अगर आपको भी आजकल 555 पीछा कर रहा है ना, तो बस थोड़ा सा ठहरिए। अपने अंदर झांक कर देखिए। देखिए कि आपकी जिंदगी की गाड़ी कहां अटकी पड़ी है? कौन सा वो डर है जो आपको जकड़े हुए है? कौन सा वो फैसला है जिसे लेने से आप बस भाग रहे हैं?
क्योंकि सच तो यही है कि रास्ता आपको पता है। जवाब आपके ही अंदर है। बदलाव डराता है यार। हम सबको डराता है। पर चाहे वो कोई नौकरी हो, कोई घुटन भरा रिश्ता हो, या आपकी अपनी पहचान... यही वो मुश्किल और कच्चे पल होते हैं जो हमें अंदर से फौलाद बनाते हैं।
तो अगली बार जब ये 555 आपकी आंखों के सामने आए, तो मुस्कुराना और खुद से पूछना— तो यूनिवर्स, अब मेरी लाइफ में क्या नया आने वाला है? अगर आपके साथ भी ऐसा कुछ हुआ है ना... कोई ऐसा यूनिवर्स का मैसेज या 555 वाला एक्सपीरियंस, तो मुझसे ज़रूर शेयर करना। कमेंट करके बताओ कि आपको मेरा ये अनुभव कैसा लगा। मुझे आपके जवाब का इंतज़ार रहेगा।
Written By- Shrawan Kumar Maurya


